सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है

सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है।
नहीं मालुम मुझे शायर, ज़माना क्यों समझता है।।

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जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का

जिसके आंचल में खेला उस अवनी का।
सूरज, चाँद,सितारे, दिन का रजनी का।
जीवन देकर के भी ऋण न चुका पाऊं,
जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का।।


षड्यंत्रों की अब भरमारी लगती है।
सांसे गिनना भी गद्दारी लगती है।
आओ हम सब मिलकर के आह्वान करें,
भारत माता जिसको प्यारी लगती है।।


निज शोणित से भाल सजाये बैठे हैं।
बलिदानों की ढाल सजाये बैठे हैं।
अपने प्राणों की आहुति दे देने को,
हम जीवन की थाल सजाये बैठे हैं।।


 लाचारीे ने मुझको कुछ कहने न दिया।
अन्तर्मन ने फिर भी चुप रहने न दिया।
निज गीतों में वो सागर छलकाया है,
जिसको आँसू बनकर के बहने न दिया।।


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औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है

मैं प्यार का परचम हूँ, तू शान-ए-मुहब्बत है।
औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है।।


जो दिल में धड़कती है, साँसों में सिमटती है,
उम्मीद मेरे दिल की अरमान-ए-मुहब्बत है।।


कर पायेगी दुनिया, हमको न जुदा दिलवर,
मैं दिल-ए-दीवाना हूँ, तू जान-ए-मुहब्बत है।।


कर डाला फ़ना तुझपे, सब कुछ अपना मैंने
तू दिल की तमन्ना है एहसान-ए-मुहब्बत है।।


न रास कभी आया, दुनिया को कोई किस्सा
मसलन लैला मजनू अफ़सान-ए-मुहब्बत है।।


टूटे हैं हज़ारों दिल, पर नाम वफ़ा का है,
बेशक कुछ तो आखिर ईमान-ए-मुहब्बत है।।


जो लूट गया मेरे, अरमानों की नगरी को,
उसको “प्रदीप” मेरा, एलान-ए-मुहब्बत है।।


“प्रदीप”

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ज़ख्म तो भर गया मगर

रब की तो मेहरबानि-ओ-इनायत बनी रही।
हमसे जमाने को मगर शिकायत बनी रही।।

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कुछ बेहतरीन शेर

बजाहिर मेरे पास लफ्ज़ों के सिवा कुछ भी नहीं।
कुछ पुरानी यादों, कुछ रिस्तों के सिवा कुछ भी नहीं।।
लोग कहते हैं, मैं तन्हाँ क्यों, मैं, अकेला क्यों हूँ,
मेरे मुकद्दर, मेरी तकदीर में, अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं।।


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तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा।
मैं शब-ए-ग़म की तन्हाई में रोता रहा।।

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हमारे गीत भी दुनिया हमारे बाद गायेगी

अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ।
लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ।
ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे,
अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।


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हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम

हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम।
लबों पे नाम चाहत का, कभी लाकर के देखो तुम।
खुद भी रो पड़ोगे, और दुनिया को रूला दोगे,
हमारे गीत महफ़िल में, कभी गाकर के देखो तुम।।


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चाहत के परदे पे मेरी उम्मीदों के सितारे हैं

चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं।
कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।

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किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है

।।इश़्क।।

किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है।
किसी की यादों में ज़िन्दगी बिताना इश्क है।।

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