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तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा। मैं शब-ए-ग़म की तन्हाई में रोता रहा।। Advertisements

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सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है

सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है। नहीं मालुम मुझे शायर, ज़माना क्यों समझता है।।

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हमारे गीत भी दुनिया हमारे बाद गायेगी

अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ। लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ। ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे, अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।

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चाहत के परदे पे मेरी उम्मीदों के सितारे हैं

चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं। कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।

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गमज़दा है दिल, कोई ग़मख्वार की बातें करें। आज फिर से जुल्फ़ की, रुख्सार की बातें करें।।

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सुबह से शाम तक उसके, मैं खोया हूँ खयालों में। दीवानेपन में आया भूल, रास्ता मैं उजालों में।।

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