मुक्तक

हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम।
लबों पे नाम चाहत का, कभी लाकर के देखो तुम।
खुद भी रो पड़ोगे, और दुनिया को रूला दोगे,
हमारे गीत महफ़िल में, कभी गाकर के देखो तुम।।

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अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ।
लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ।
ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे,
अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।

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