हमें तो इश्क के काबिल बनाया उसने

इस कदर दिल से दिल लगाया उसने।
हमें तो इश्क के काबिल बनाया उसने।।

दिल तो नादान था, हमको खबर न थी,
इश्क क्या है? हमको बताया उसने।।

वो हसीं रात और वो मंज़र अज़ीज था,
ज़ब अपने रुख से परदा हटाया उसने।।

न भटकने दिया कभी शब-ए-जिन्दगी में
दिल की ताक पे चराग जलाया उसने।।

आज भी चराग फरोजाँ हैं, मुकम्मल भी
तारीक-ए-मुकद्दर में नूर सजाया उसने।।

प्रदीप

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