ग़ज़ल

दिल में हर लम्हा, जो धड़कती है, यही ग़जल है।
बन के अरमान, जो मचलती है, यही ग़जल है।।

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न ज़िन्दगी की तमन्ना, न खौफ़ शहादत का है।
आज कुछ रंज दिल में, है तो बगावत का है।।

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गमज़दा है दिल, कोई ग़मख्वार की बातें करें।
आज फिर से जुल्फ़ की, रुख्सार की बातें करें।।

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 किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है।
किसी की यादों में ज़िन्दगी बिताना इश्क है।।

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 सुबह से शाम तक उसके, मैं खोया हूँ खयालों में।
दीवानेपन में आया भूल, रास्ता मैं उजालों में।।

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 चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं।
कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।

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 सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है।
नहीं मालुम मुझे शायर, ज़माना क्यों समझता है।।

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तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा।
मैं शब-ए-ग़म की तन्हाई में रोता रहा।।

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