Category Archives: Ghazal

जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का

जिसके आंचल में खेला उस अवनी का। सूरज, चाँद,सितारे, दिन का रजनी का। जीवन देकर के भी ऋण न चुका पाऊं, जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का।। षड्यंत्रों की अब भरमारी लगती है। सांसे गिनना भी गद्दारी लगती है। आओ … Continue reading

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औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है

मैं प्यार का परचम हूँ, तू शान-ए-मुहब्बत है। औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है।। जो दिल में धड़कती है, साँसों में सिमटती है, उम्मीद मेरे दिल की अरमान-ए-मुहब्बत है।। कर पायेगी दुनिया, हमको न जुदा दिलवर, मैं दिल-ए-दीवाना हूँ, तू … Continue reading

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कुछ बेहतरीन शेर

प्रदीप कुमार पाण्डेय के कुछ बेहतरीन शेर Continue reading

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हमारे गीत भी दुनिया हमारे बाद गायेगी

अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ। लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ। ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे, अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।

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हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम

हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम। लबों पे नाम चाहत का, कभी लाकर के देखो तुम। खुद भी रो पड़ोगे, और दुनिया को रूला दोगे, हमारे गीत महफ़िल में, कभी गाकर के देखो तुम।।

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