Category Archives: ग़ज़ल

ज़ख्म तो भर गया मगर

रब की तो मेहरबानि-ओ-इनायत बनी रही। हमसे जमाने को मगर शिकायत बनी रही।। Advertisements

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तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा। मैं शब-ए-ग़म की तन्हाई में रोता रहा।।

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सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है

सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है। नहीं मालुम मुझे शायर, ज़माना क्यों समझता है।।

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चाहत के परदे पे मेरी उम्मीदों के सितारे हैं

चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं। कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।

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किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है

।।इश़्क।। किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है। किसी की यादों में ज़िन्दगी बिताना इश्क है।।

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गमज़दा है दिल, कोई ग़मख्वार की बातें करें। आज फिर से जुल्फ़ की, रुख्सार की बातें करें।।

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सुबह से शाम तक उसके, मैं खोया हूँ खयालों में। दीवानेपन में आया भूल, रास्ता मैं उजालों में।।

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जिन्होने है नहीं देखी, कभी सूरत मुहब्बत की। नहीं समझेंगे वो ज़ालिम, कभी कीमत मुहब्बत की।।

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तू छोड़ के जब से मुझको गया, मेरे दिल ने धड़कना छोड़ दिया। पलकों पे अश्क सजे जब से, आँखों ने फड़कना छोड़ दिया।।

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बहती धारा आँसुओं की, कह गई। अब मुहब्बत, बस मुहब्बत रह गई।।

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