Author Archives: प्रदीप कुमार पाण्डेय "प्रदीप"

जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का

जिसके आंचल में खेला उस अवनी का। सूरज, चाँद,सितारे, दिन का रजनी का। जीवन देकर के भी ऋण न चुका पाऊं, जीवन ज्योति जगाने वाली जननी का।। षड्यंत्रों की अब भरमारी लगती है। सांसे गिनना भी गद्दारी लगती है। आओ … Continue reading

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औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है

मैं प्यार का परचम हूँ, तू शान-ए-मुहब्बत है। औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है।। जो दिल में धड़कती है, साँसों में सिमटती है, उम्मीद मेरे दिल की अरमान-ए-मुहब्बत है।। कर पायेगी दुनिया, हमको न जुदा दिलवर, मैं दिल-ए-दीवाना हूँ, तू … Continue reading

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ज़ख्म तो भर गया मगर

रब की तो मेहरबानि-ओ-इनायत बनी रही। हमसे जमाने को मगर शिकायत बनी रही।।

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कुछ बेहतरीन शेर

प्रदीप कुमार पाण्डेय के कुछ बेहतरीन शेर Continue reading

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तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा। मैं शब-ए-ग़म की तन्हाई में रोता रहा।।

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सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है

सदा-ए-दिल को भी मेरी, तराना क्यों समझता है। नहीं मालुम मुझे शायर, ज़माना क्यों समझता है।।

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हमारे गीत भी दुनिया हमारे बाद गायेगी

अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ। लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ। ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे, अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।

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हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम

हमारे दिल की मायूसी, कभी आकर के देखो तुम। लबों पे नाम चाहत का, कभी लाकर के देखो तुम। खुद भी रो पड़ोगे, और दुनिया को रूला दोगे, हमारे गीत महफ़िल में, कभी गाकर के देखो तुम।।

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चाहत के परदे पे मेरी उम्मीदों के सितारे हैं

चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं। कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।

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किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है

।।इश़्क।। किसी की चाहत में फ़ना हो जाना इश्क है। किसी की यादों में ज़िन्दगी बिताना इश्क है।।

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