औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है

मैं प्यार का परचम हूँ, तू शान-ए-मुहब्बत है।
औरों से जुदा अपनी पहचान-ए-मुहब्बत है।।


जो दिल में धड़कती है, साँसों में सिमटती है,
उम्मीद मेरे दिल की अरमान-ए-मुहब्बत है।।


कर पायेगी दुनिया, हमको न जुदा दिलवर,
मैं दिल-ए-दीवाना हूँ, तू जान-ए-मुहब्बत है।।


कर डाला फ़ना तुझपे, सब कुछ अपना मैंने
तू दिल की तमन्ना है एहसान-ए-मुहब्बत है।।


न रास कभी आया, दुनिया को कोई किस्सा
मसलन लैला मजनू अफ़सान-ए-मुहब्बत है।।


टूटे हैं हज़ारों दिल, पर नाम वफ़ा का है,
बेशक कुछ तो आखिर ईमान-ए-मुहब्बत है।।


जो लूट गया मेरे, अरमानों की नगरी को,
उसको “प्रदीप” मेरा, एलान-ए-मुहब्बत है।।


“प्रदीप”

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